कभी कभी हम इतने तनहा क्यों हो जाते हैं !!
के सांस लेने पर भी एक आहात सी लगती है !!
कभी तो समझ लेते हैं ख़ामोशी को भी सब की !!
और कभी कभी महफ़िल में भी एक ख़ामोशी सी लगती है !!
ज़िन्दगी तू है आती पेश इस तरह अक्सर हमसे !!
के है तो अपनी मगर अक्सर अजनबी सी लगती है !!
कभी कभी हम इतने तनहा क्यों हो जाते हैं !!
के सांस लेने पर भी एक आहात सी लगती है !!
के सांस लेने पर भी एक आहात सी लगती है !!
कभी तो समझ लेते हैं ख़ामोशी को भी सब की !!
और कभी कभी महफ़िल में भी एक ख़ामोशी सी लगती है !!
ज़िन्दगी तू है आती पेश इस तरह अक्सर हमसे !!
के है तो अपनी मगर अक्सर अजनबी सी लगती है !!
कभी कभी हम इतने तनहा क्यों हो जाते हैं !!
के सांस लेने पर भी एक आहात सी लगती है !!
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