एक अजनबी सा एहसास जो पल पल दिल को सताता है !!
कभी डराता है मुझको तो कभी मुझको इस कदर अपनाता है !!
खामोश सा हो जाता हु अक्सर जब तेरे न होने का ख्याल मुझको आता है !!
एहसास यह कुछ और नहीं बस तेरे ना होने का एक मलाल है !!
तू मुझ में समाया है इस कदर के रूह से जुड़ा जिस्म होने का यह एक सवाल है !!

एक अजनबी सा एहसास जो पल पल दिल को सताता है !!
कभी डराता है मुझको तो कभी मुझको इस कदर अपनाता है !!

कभी तुझ में इस कदर खुद को मैंने महसूस किया था !!
के तेरे साथ हर पल में मैंने भी एक बार ज़िन्दगी को मुस्कुरा कर जिया था !!
आज तू नहीं है पर तेरे एहसास साथ में हैं !!
मानो चाँद दिख रहा जैसे अँधेरी रात में है !!

एक अजनबी सा एहसास जो पल पल दिल को सताता है !!
कभी डराता है मुझको तो कभी मुझको इस कदर अपनाता है !!

गहराई मेरे एहसासों की बस तू ही समझ पाया था !!
के तुझे पा कर मैंने भी ज़िन्दगी का नग़मा गाया था !!
आज बस एक ख़ामोशी सी इस कदर जुबान पर छायी सी है !!
नज़रों को कोई मेरी पढता नहीं और लफ़्ज़ों पे मेरे स्याही काली सी गहराई है !!

एक अजनबी सा एहसास जो पल पल दिल को सताता है !!
कभी डराता है मुझको तो कभी मुझको इस कदर अपनाता है !!



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