क्यों यह महफ़िलें न राज़ आती हैं हमको !!
के अब तो तन्हाई में हम दिल को बहलाते हैं !!
तनहा बैठे रहते हैं वीरानों में हम!!
इसलिए शायद दुनिया की नज़रों में हम पागल कहलाते हैं !!

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