कैसे अजीब सी कशम काश से गुजर रही है यह ज़िन्दगी!!
कभी दोस्त तो कभी दुश्मन लगने लगी है यह ज़िंदगी!!
हर मोड़ पर एक पहेली बन कर सामने आती है यह ज़िन्दगी !!
कभी अपनों को पराया तो कभी परायो को अपना करती है यह ज़िन्दगी!!!
कभी झखम तो कभी उस झखम का मरहम बनती है यह ज़िंदगी!!!
ज़िन्दगी!!! ज़िन्दगी!!! ज़िन्दगी!!!
न कर हमसे तू यु इस कदर बंदगी!!
कभी एक न ख़तम होने वाला सफर लगती है यह ज़िंदगी !!
तो कभी एक पल में ही मानो हमसफ़र सी लगती है ज़िन्दगी!!
ज़िन्दगी!!
ज़िंदगी!!
ज़िंदगी
कभी दोस्त तो कभी दुश्मन लगने लगी है यह ज़िंदगी!!
हर मोड़ पर एक पहेली बन कर सामने आती है यह ज़िन्दगी !!
कभी अपनों को पराया तो कभी परायो को अपना करती है यह ज़िन्दगी!!!
कभी झखम तो कभी उस झखम का मरहम बनती है यह ज़िंदगी!!!
ज़िन्दगी!!! ज़िन्दगी!!! ज़िन्दगी!!!
न कर हमसे तू यु इस कदर बंदगी!!
कभी एक न ख़तम होने वाला सफर लगती है यह ज़िंदगी !!
तो कभी एक पल में ही मानो हमसफ़र सी लगती है ज़िन्दगी!!
ज़िन्दगी!!
ज़िंदगी!!
ज़िंदगी
Comments
Post a Comment