खुद के करीब आने के लिए में इस भीड़ से दूर जाना चाहता  हु !के में एक बार खुद के लिए मुस्कुराना चाहता हु!

कभी वक़्त काम पद गया तो कभी आँखें नम्म हो गयी!कम हो जाए फासला जो मेरा और मेरे आईने के  दरमियान है!!में इस कदर खुद में समा जाना चाहता हु!!!

 खुद के करीब आने के लिए में इस भीड़ से दूर जाना चाहता  हु !के में एक बार खुद के लिए मुस्कुराना चाहता हु!

लम्हे यह ज़िन्दगी के चल रहे  हैं बिना रुके हर दम ,के में कुछ पल के लिए उस एक पल में ठहर जाना चाहता   हूँ!!
रूठा हु में खुदसे ,यह अक्सर आइना मुझको कहता है और में खुद को मनाना चाहता हू !!

 खुद के करीब  आने के लिए में इस भीड़ से दूर जाना चाहता  हु !के में एक बार खुद के लिए मुस्कुराना चाहता हु!

बचपन हाथ में था तो सोचता था के में बड़ा होना चाहत हू  और अब जो बड़ा हुआ तो फिर से अपने बचपन में जाना चाहता हू !!

कल की फ़िक्र में मेरा आज है , पर में मेरे आज में कल को भूल जाना चाहता हूँ !!

खुद के करीब आने के लिए में इस भीड़ से दूर जाना चाहता  हु !के में एक बार खुद के लिए मुस्कुराना चाहता हु!

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